पहला-पहला प्यार




पहला-पहला प्यार ठीक वैसा ही होता है, जिस तरह तपती धरती
में पानी की शीतल बूँद। बात उन दिनों की हैं, जब मै हर साल की
तरह गर्मियों की छुट्टियों में दादी के घर गई थी।सहेलियों के साथ
समय मौज-मस्ती में बीत रहा था। एक दिन मैं अपनी सहेली के
साथ छत पर खङी थी,तभी मेरी नजर नीचे एक छोटी सी दुकान
पर गई,वहाँ 3-4 लड़के खड़े थे,और उन में से एक साँवले रंग का
लड़का जिसके धुधराले बाल थे,और वो मुसकुराते हुए मेरी ओर
ही देख रहा था, उसकी मुस्कुराहट भी गजब की थी दोनों गालों
पर डिंपल पड रहे थें।

मैं तो उसे देखती ही रह गई,और वो मुझे देख रहा था। उस
लड़के के दोस्त हँसने लगे तो मैं शर्म से हुई लाल हो गई,और
वहाँ से हट गई।
मगर उसका चेहरे मेरे दिल में  बस गया। अब तो मैं बहाने से
कभी छत पर तो कभी आँगन में जाने लगी,कि वो फिर दिख
जाए। सहेलियों से पता चला वो दिनभर अपनी दुकान पर
रहता है। वो जब भी आता बाहर खड़े होकर मेरे घर की तरफ
ही देखता रहता। धीरे-धीरे हम दोनों एक-दूसरे का इन्तजार करने
लगे।
मुझे उसे देखे बिना चैन ही नही मिलता था।हमारा आँखो ही
आँखो वाला प्यार चल रहा था। न उसने कभी मुझसे बात की न मैंने। उसका तो पता नहीं, मैं उससे बहुत प्यार करने लगी थी।
मुझे केवल उसका नाम पता चल पाया।

कालेज की छुट्टियाँ ख़त्म होने वाली थी,तो मुझे अपने घर वापस आना था। मैंने सोचा,-'वो' मुझसे बात करेंगा। लेकिन ऐसा नही हुआ।
अफसोस जिस दिन मुझे आना था,वो एक बार भी नहीं दिखा।
दिल में  उसकी सूरत लिये मैं उदास होकर लौट आई।

फिर हम कभी नहीं मिलें। मैं 1-2 बार ही दादी के पास गई, लेकिन वो नहीं दिखा। इस बात को करीब 20 साल हो गये हैं। मैं आज भी
उसे नहीं भूल पाई हूँ। Fb  पर कई बार उसे ढूंढा,कि एक बार शक्ल ही देख लूँ, मगर वो नही मिला।

मेरा पहला प्यार आज भी मेरे दिल में  बसा हैं, और यह बात मैंने अपनी 16 साल की बेटी को भी बताई हैं।

सच है पहला-पहला प्यार बडा़ निराला होता हैं।
I miss him a lot.




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